Fundamentals of CAD CAM

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Fundamentals of CAD/CAM

[Index]
0. Introduction
1. History, Concept and definition of CAD/CAM
 1.1 History of CAD/CAM
 1.2 Concept of CAD/CAM
 1.3 Definition of CAD/CAM
 1.4 Activities of CAD/CAM System
 1.5 Basic Requirement of CAD/CAM System
2. Need, Special Features and Benefits of CAD/CAM
 2.1 Need of CAD/CAM
 2.2 Special Features of CAD/CAM
 2.3 Benefits of CAD/CAM
 2.4 Applications of CAD/CAM
3. Design Steps and Reasons of Implementing CAD System
 3.1 Definition of Design
 3.2 Steps of Design Process
 3.3 Application of Computer in Designing
  3.3.1 Information about Geometric Modelling
  3.3.2 Engineering Analysis
  3.3.3 Simulation
  3.3.4 Automatic Drafting
 3.4 Functional Areas of CAD/CAM
  3.4.1 Geometric Modelling
  3.4.2 Engineering Analysis
  3.4.3 Design Review and Evaluation
  3.4.4 Automatic Drafting
  3.4.5 Other Important Works


0. Introduction

There are many simple and very difficult procedures involved in automation time. In this, the CAD/CAM system can be responsible for accelerating the expansion of automation and responsible for achieving success in many difficult areas.

It is time for the middle of the second industrial revolution in the present century. Where computers have been promoted in human functioning. Today the computer has made such a way to make a long remembrance and fast counting. Along with the quality of acquiring much technology, computer hardware has become cheap, respectively. Due to which they have become widely available for the big companies and on a broad base. Apart from the use of computers, you can not think of moving forward to any major engineering project successfully. The result is a lot of approval for CAE (Computer Aided Engineering). Due to this, due to the huge number of trouble filled with various names and methods such as,

– CAD – (Computer Aided Design)
– CAM – (Computer Aided Manufacturing)
– CADD – (Computer Aided Drafting and Designing)
– CAPM – (Computer Aided Production Management)
– CAPP – (Computer Aided Process Planning)

CAM is not basically successful of that CAD, but both are together or equally useful. CAD and CAM have been developed in different ways in the last 25-30 years and both are being compiled in one system. The word CAD/CAM integrates the usefulness of the computer from the drawing to the production, from machinery to the assembly shop, from the quality control department to the dispatch department for manufacturing of the product.

In fact, CAD / CAM has become the ideal to increase production efficiency. But CAD or CAM is not independently of the solution.

1. History, Concept and definition of CAD/CAM

Now we will see the definition of CAD/CAM with the above issue, the concept of CAD/CAM before all. Figure 1.0 of structure CAD/CAM is illustrated.

The CAD can be defined as follows.

The use of computer systems in design, change and analysis means CAD.

The CAD hardware includes the computers, one and more graphics, the terminals showing the graphics and other means. CAD software includes component stress-strain analysis, dynamic response of mechanical composition, energy comprising of mathematical and numerical control part programming.

The CAM can be defined as follows.

Organizing and controlling the manufacturing process by compiling a direct or indirect output source of computer.

According to the definition of CAM, it can be classified into two parts as follows:

1. Computer overview and control
2. Useful utility in production

1.1 History of CAD/CAM
1.2 Concept of CAD/CAM
1.3 Definition of CAD/CAM
1.4 Activities of CAD/CAM System
1.5 Basic Requirement of CAD/CAM System
2. Need, Special Features and Benefits of CAD/CAM
2.1 Need of CAD/CAM
2.2 Special Features of CAD/CAM
2.3 Benefits of CAD/CAM
2.4 Applications of CAD/CAM
3. Design Steps and Reasons of Implementing CAD System
3.1 Definition of Design
3.2 Steps of Design Process
3.3 Application of Computer in Designing
3.3.1 Information about Geometric Modelling
3.3.2 Engineering Analysis
3.3.3 Simulation
3.3.4 Automatic Drafting
3.4 Functional Areas of CAD/CAM
3.4.1 Geometric Modelling
3.4.2 Engineering Analysis
3.4.3 Design Review and Evaluation
3.4.4 Automatic Drafting
3.4.5 Other Important Works

CAD/CAM की बुनियादी समझ

[सुची]
०. परिचय
१. CAD/CAM का इतिहास, अवधारणा और परिभाषा
 १.१ CAD/CAM का इतिहास
 १.२ CAD/CAM की अवधारणा
 १.३ CAD/CAM की परिभाषा
 १.४ CAD/CAM की गतिविधिया
 १.५ CAD/CAM प्रणाली की मूल ज़रूरते
२. CAD/CAM की जरुरत, विशेष विशेषताए और लाभ
 २.१ CAD/CAM की जरुरत
 २.२ CAD/CAM के विशेष विशेषताए
 २.३ CAD/CAM के लाभ
 २.४ CAD/CAM के उपयोग
३. डिज़ाइन कदम और CAD/CAM को लागू करने के कारण
 ३.१ डिज़ाइन की परिभाषा
 ३.२ डिज़ाइन प्रक्रिया के कदम
 ३.३ डिजाइनिंग में कंप्यूटर का उपयोग
  ३.३.१ ज्यामितीय मॉडलिंग के बारे में जानकारी
  ३.३.२ इंजीनियरिंग विश्लेषण
  ३.३.३ सिम्युलेशन
  ३.३.४ स्वचालित प्रारूपण
 ३.४ CAD/CAM के कार्यात्मक क्षेत्र
  ३.४.१ ज्यामितीय मॉडलिंग
  ३.४.२ इंजीनियरिंग विश्लेषण
  ३.४.३ डिजाइन की समीक्षा और मूल्यांकन
  ३.४.४ स्वचालित प्रारूपण
  ३.४.५ अन्य महत्वपूर्ण कार्यो


०. परिचय:

स्वचालन के समय में बहुत सारी सरल और बहुत ही कठिन प्रक्रियाए शामिल होती हैं। उसमे CAD/CAM व्यवस्था को स्वचालन का विस्तार में तेजी लाने के लिए और बहुत सारे कठिन क्ष्रेत्रो में सफलता प्राप्त करने के लिए जिम्मेदार गिन सकते हैं।

वर्तमान सदी वोह दूसरीऔद्योगिक क्रांति का बिच का समय हैं। जहा कोम्पुटर ने मानवी की कार्यक्षमता में बढ़ावा किया हैं। आज कंप्यूटर एक लम्बी स्मरणशक्ति युक्त और तेजी से गणतरी कर सके एसा साधन बना हुआ हैं। साथ में कई प्रौद्योगिकी प्राप्त करने का गुणवत्ता के कारण कंप्यूटर हार्डवेर क्रमशः सस्ते बन ने लगे हैं। जिसके कारण वेह बहुत मोटा विभाग की औद्योगिक संस्थाओ के लिए और एक आधार पर व्यापक रूप से उपलब्ध हो गए हैं। कंप्यूटर के उपयोग के अलावा किसी भी बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना एसा विचार नहीं सकते। इसके परिणाम CAE(Computer Aided Enigineering)को बहुत स्वीकृति है। उसके कारण बहुत बड़ी संख्याओ में परेशानी से भरा हुआ और विभिन्न नामों की पद्धतिया जैसे की,

– CAD – (Computer Aided Design)
– CAM – (Computer Aided Manufacturing)
– CADD – (Computer Aided Drafting and Designing)
– CAPM – (Computer Aided Production Management)
– CAPP – (Computer Aided Process Planning)

CAM वह CAD का मूल रूप से सफल नहीं हो रहा है, किन्तु दोनों एक साथ या समान रूप से उपयोगी हैं। CAD और CAM पिछले 25-30 वर्षों में अलग-अलग तरीकों से विकास हुआ है और दोनों का एक सिस्टम में संकलन किया जा रहा हैं। CAD/CAM शब्द वह कंप्यूटर की उपयोगिता को प्रोडक्ट का विनिर्माण के लिए ड्राइंग से उत्पादन तक, मशीनरी से अस्सेम्बली शॉप तक, क्वालिटी कण्ट्रोल विभाग से डिस्पेच विभाग तक एकीकृत करता है।

वास्तव में, CAD/CAM उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आदर्श बन गया है। किन्तु केड या केम स्वतंत्र रूप से उसका उकेल नहीं हैं।

१. CAD/CAM का इतिहास, अवधारणा और परिभाषा:

अब हम ऊपर बयाए गए मुद्दे से CAD/CAM का इतिहास, अवधारणा को समजेंगे सब से पहले CAD/CAM की परिभाषा देखेंगे. आकृति: १.० CAD/CAM की संरचना चित्रित की गई हैं:

CAD को निम्नानुसार परिभाषित किया जा सकता है।

डिज़ाइन की रचना, परिवर्तन और विश्लेषण में कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग का मतलब है CAD।

CAD हार्डवेर में कंप्यूटर, एक और कई सारे ग्राफ़िक्स दर्शाए हुए टर्मिनल्स और दुसरे तेने लगत साधनों का समावेश होता हैं। CAD सॉफ्टवेयर में घटक स्ट्रेस-स्ट्रेइन विश्लेषण, यांत्रिक रचना की गतिशील प्रतिक्रिया, उर्जा वहांकी गणतरी और न्यूमेरिकल कंट्रोल पार्ट प्रोग्रामिंग का समावेश होता हैं।

CAM को को निम्नानुसार परिभाषित किया जा सकता है।

कंप्यूटर के प्रत्यक्ष या परोक्ष उत्पादन स्त्रोत साथ के संकलन के द्वारा विनिर्माण प्रोसेस का आयोजन और नियंत्रण।

CAM की परिभाषा के अनुसार उसको निम्नानुसार दो भाग में वर्गीकृत कर सकते हैं:

१. कंप्यूटर अवलोकन और नियंत्रण
२. उत्पादन में सहायक उपयोगिता

१.१ CAD/CAM का इतिहास:

ग्राफ़िक्स संचार की शुरुआत को सायद CAD/CAM की शुरूआत गिना जाये तो गलत नहीं लिखा जायेगा। यह शुरुआत इजिप्ट, ग्रीस और रोम में हुई।

१७४६ – १८१८ की अवधि में गेसपार्ड मोन्डो ने ओर्थोग्रफिच्स प्रोजेक्ट की खोज की हैं।

कंप्यूटर और झेरोक्षग्राफी ने CAD/CAM को जन्म दिया। CAD/CAM का विकास अंतिम चार दशकमे चार अवस्था में हुआ।

१. १९५० का दशक (टर्निंग पॉइंट्स)
२. १९६० का दशक (टर्निंग पॉइंट्स)
३. १९७० का दशक (उपयोग की शुरुआत)
४. १९८० का दशक (विकास और आधुनिकीकरण)

१. १९५० का दशक:

इस बीच में CRT, NC, APT विगेरे की खोज हुई। जिसमे MIT, GM विगेरे का योगदान अधिक था और उसका उपयोग सैन्य में बड़े पैमाने पर हुआ।

२. १९६० का दशक:

स्केचपेड़ सिस्टम से बड़े कंप्यूटर ग्राफ़िक्स से ड्रोइंग तैयार करके सब से पहले CAD शब्दप्रयोग प्रसार हुआ। उसके बाद DACI(Design augmented computers), CAD/CAM, Graphic जैसी पद्धतीओका निर्माण हुआ।

३. १९७० का दशक:

इन्डस्ट्रिझ, गवर्मेंट और कॉलेज से प्रोडक्टिविटी बढ़ने के लिए कंप्यूटर ग्राफ़िक्स का उपयोग बढ़ा और NCGA(National Computer Graphics Association)स्थापित हुआ और साथ ही साथ IGES(Initial Graphics Exchange Specification) की शुरुआत हुए और ड्राफ्टमेन साथ ही साथ डिज़ाइन इंजीनियरको मॉडलिंग और ड्राफ्टिंग के लिए जरुरु 3D डेटाबेझ मिला। एसी पद्धति 16-bit मशीन के स्वरूप थी और बड़े अधिक हिस्से मेन्युअल प्रकार की थी।

४. १९८० का दशक:

यह दशक के दौरान CAD/CAM पद्धति में बहुत सारे बदलाव हुए और उसमे ओटोमेशन जोडके Factory of the future का चित्र खड़ा हुआ। 3D की अवधारणा विकसित हुआ। तथा रोबोटिक्स, सिम्युलेशन, फाईनाइट एलीमेन्ट एनालिसिस में बहुत सारा सुधारा हुआ और ओटोमेट कोन्सेप्चुअल डिज़ाइन की गति मिली।

साथ ही साथ सॉलिड मॉडलिंग जैसे प्रबंधन अस्तित्व में आये। माइक्रो कंप्यूटर आधारित और वर्कस्टेशन आधारित CAD/CAM पद्धति मार्केटमें आई। यहइतिहास देखते हुए CAD का भविष्य बहुत ही उज्जवल हैं और चल रही खोज उसको बहुत ही तेज और बहुत सारी हार्डवेर, नेटवर्किंग और सॉफ्टवेर प्रदान करेगा।

१.२ CAD/CAM की अवधारणा:

डिज़ाइन और ड्राफ्टिंग व्यापार में सब से महत्त्व का इंजीनियरिंग विकास कंप्यूटर की उपयोगिता से हुआ हैं। डिज़ाइन और ड्राफ्टिंग बहुत ही सरल तरीके से हो सकता हैं और उसको बनाने की रीत में क्रांतिकारी बदलाव हो सकते हैं।

अगर ऊपर दि गई सुचना को सीधा उत्पादक यूनिट को भेजा जाये तो वह प्रणाली CAD/CAM के रूप में जाना जाता हैं।

आकृति १.३ में CAD/CAM की उपर की अवधारणा में देखाया गया हैं।

१.३ CAD/CAM की परिभाषा:

सरल भाषा में CAD एक एसी शाखा हीब जिसमे नई प्रोडक्ट बनाने या पुरानी प्रोडक्ट में महत्त्व का सुधारा कर के आखरी फिजिकल प्रोडक्ट में कन्वर्ट करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करना पड़ता हैं।संक्षेप मैं,

CAD का मतलब डिज़ाइन की रचना, बदलाव और विश्लेषण में कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग।

इसी के अनुसार, CAM में प्रोडक्ट बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया योजना, उपकरण के लिए डिज़ाइन और CNC कार्यक्रम कोड तैयार करके CND मशीन या उसके जैसा अन्य स्वचालित मशीनरी का उपयोग कर के प्रोडक्ट की असेम्बली भी आधुनिक रोबोट की सहायता से करनी होती हैं।

CAM का मतलब कंप्यूटर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, उत्पादन स्त्रोत साथ ही साथ एकीकरण से विनिर्माण प्रक्रिया का योजना और नियंत्रण। १.४ CAD/CAM प्रणाली की गतिविधिया:

वास्तव में CAD/CAM प्रणाली की गतिविधिया की सुची बहुत बड़ी हैं। सामान्य भाषा में बात अगर की जाये तोह डिज़ाइन का मतलब प्रोडक्ट का आकार, डायमेंशन, सरफेस फिनिश, मटिरियल और आवश्यक स्ट्रेन्थ की गणना करना और उसकी डिज़ाइन बनाना। इसलिए प्रोडक्ट उसके अनुसार बना सकते हैं। विनिर्माण मतलब डिज़ाइन अनुसार प्रोडक्ट तैयार करना. किन्तु इस प्रोडक्ट को एसी रीत तैयार करना होता हैं या इसलिए उसकी किंमत कम से कम और गुणवत्ता अधिक से अधिक मिले। इस लिए उपकरण इंजीनियरिंग या प्रक्रिया इंजीनियरिंग जरुरी बनती हैं। ऊपर बताई गई गतिविधिया इन्सान को बदले कंप्यूटर करे तब वह CAD/CAM प्रणाली बनती हैं। CAD/CAM डिज़ाइन और विनिर्माण के बिच अखंडता का वर्णन करता हैं।

आकृति १.४ में CAD/CAM में दिखाए गए गतिविधिया का अर्थ बताया गया हैं।

१.५ CAD/CAM प्रणाली की मूल ज़रूरते:

डिज़ाइन/विनिर्माण इंजीनियर बहु मूल्य और महेंगा स्त्रोत हैं। CAD/CAM प्रणाली की मूल ज़रूरते निन्मानुसार हैं:

– ऑपरेटर एकीकरण सरल और तार्किक होना चाहिए जिस से उसका कंप्यूटर साथ का संचार मुश्केल न हो । डिज़ाइन इंजीनियर कंप्यूटर विशेषज्ञ हो एसा जरुरी नहीं और कुछ उत्पादको उसके इंजीनियरो को कंप्यूटर प्रौद्योगिकी तालीम देने के लिए इच्छुक होगा जिस से वह CAD/CAM प्रणाली का उफोतोग कर सके।
– प्रणाली डिज़ाइन इंजीनियरो जिसके अनुसार सरल कार्यपद्धति से कार्य करे उसके अनुरूप होनी चाहिए।
– प्रणाली से होते कार्य और प्रणाली के सिवा होते कार्य के बिच सरलता से संचार हो एसी प्रणाली होनी चाहिए।
– प्रणाली ऑपरेटर की विनिर्माण जरूरते और उसके अनुपात की स्वीकृति होनी चाहिए।
– प्रणाली, उत्पादन प्रणाली के विभिन्न विभिन्न हिस्से का स्वतंत्र ऑपरेशन बचा के , हरेक के हिस्से के बिच सुसंगत आसक्ति पूर्ण करके एक सम्पूर्ण स्वचालित उत्पादन प्रणाली बनाती होनी चाहिए।

२. CAD/CAM की जरुरत, विशेष विशेषताए और लाभ:

इस अनुभाग में हम CAD/CAM की जरुरत, उसकी विशेषताए और लाभ के बारे में जानेंगे।

२.१ CAD/CAM की जरुरत:

CAD/CAM प्रणाली को उद्योग में निन्मानुसार मूल कारण को उपयोग में लिया जाता हैं:

डिज़ाइनर की कार्यक्षमता बढाई जा सकती हैं:

जैसे की हमारे पास डिज़ाइन प्रक्रिया में कंप्यूटर का उपयोग को समजे थे उसके हिसाब से कहा जा सकता हैं की डिज़ाइनर प्रोडक्ट को 3D में देख सकता हैं। प्रोडक्ट की असेम्बली और सब असेम्बली ड्राइंग जल्दी से बना सकता हैं। प्रोडक्ट का विश्लेषण, संश्लेषण और ड्राफ्टिंग जल्दी से हो सकता हैं। इसलिए डिजाइनिंग किंमत और समय में कमी होती हैं। जो अंततः प्रोजेक्ट का समय बचाता हैं।

डिज़ाइन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए:

कंप्यूटर का उपयोग से बहुत ही अच्छी रीत विश्लेषण हो सकती हैं और बहुत विकल्पो मिल सकते हैं। डिजाइनिंग में होती भूलो को कम कर के बहुत ही सही ढंग से डिज़ाइन बना सकते हैं। इसलिए डिजाइनिंग की गुणवत्ता में बढ़ावा होता हैं।

माहिती संचार में जानकारी बढ़ जाती हैं:

cad प्रणाली के उपयोग से गुणवत्तायुक्त ड्राइंग बना सकते है, जो डिज़ाइन के डाक्यूमेन्टेशन में ड्राइंग का मानकीकरण में बढाता हैं, जो एक मूल्यवान माहिती का भंडार हैं जो कंप्यूटर मेमोरी में संग्रहित किया जाता हैं और जल्दी से एक से दुसरे अनुभाग को पहुचाया जाता हैं।

मेनुफक्टुरिंग के लिए डेटाबेझ तैयार किया जाता हैं:

प्रोडक्ट डिज़ाइन साइकलमें उत्पादन प्रक्रिया को योग्य रीते और जल्दी से पूर्ण करने के लिए योग्य माहितीसंचार जरुरी हैं। जिसके लिए आवश्यक हैं योग्य रीत से परिभाषित किया गया विनिर्माण डेटाबेझ। इस डेटाबेझ को कंप्यूटर से जल्द ही बना सकते हैं।

२.२ CAD/CAM के विशेष विशेषताए:

उसकी विशेष विशेषताए निन्मानुसार हैं:

– उत्पादन की प्रतिकृति तैयार की जाती हैं।
– उत्पादन के मॉडल में सौंदर्य और श्रमदक्षता शास्त्र बदलाव किया जाता हैं।
– प्रोडक्ट में विभिन्न रंग और विभिन्न आकर्षक बदलाव कर सकते हैं। जिसे केवल कंप्यूटर मॉडल पर ही देखा जा सकता हैं।
– CAD सॉफ्टवेरमें केवल प्रोडक्ट का सॉलिड मॉडल बनाके उसके सारे द्रश्य और सब असेम्बली के प्रोदुक्ट्शन ड्राइंग उसके सभी माप, टोलरन्स और फिनिस के साथ बना सकते हैं।
– दो असेम्बल पार्ट्स के बिच की इन्टरफिअरन्सकी जानकारी मिल सकती हैं अगर दो असेम्बल पार्ट्स स्थिर हो या गतिशील।
– ड्राइंग को प्लोट या प्रिन्ट ले सके एसी सुविधा भी सॉफ्टवेर प्रदान करती हैं।
– मार्केटिंग या संरक्षण के लिए मेन्युअलमें जरुरी असेम्बली के लिए ड्राइंग प्राप्त किया जा सकता हैं।
– उत्पादन का भिन्न भिन्न द्रष्टिकोण से अध्ययन किया जा सकता हैं। जैसे की मटिरियल विशेषताये, किंमत, वेल्यु इंजीनियरिंग, विनिर्माण प्रक्रिया, ल्युब्रिकेशन, सर्विस और सरक्षण।
– प्रोडक्ट की सभी विवरण और सभी द्रश्य को संग्रहीत कर के रखा जा सकता हैं और भविष्य में उसके जैसी कोई प्रोडक्ट का उत्पादन के समय उपयोग लिया जा सकता हैं।

२.३ CAD/CAM के लाभ:

– ड्राइंग या डिज़ाइन के लिए लगता समय में बहुत बचाव होता हैं। डिज़ाइन की गणना अधिक सटीक हो सकती हैं।
– तैयार किया गया ड्राइंग या डिज़ाइन में आसानी से सुधार किया जा सकता हैं।उसमे त्रुटी की संभावनाए बहुत कम होती हैं।
– ड्राइंग या डिज़ाइन कंप्यूटर में होने के कारण बर्षो तक उसका ख़राब होना या कागज मोड़ जाने का सवाल ही पैदा नही होता। इसके अलावा, ड्राइंग या डिज़ाइन को कभी भी आसानी से वापिस प्राप्त किया जा सकता हैं।
– तकनिकी कर्मचारिओं की कम जरुरत रहती हैं।
– डिज़ाइन की एकरूपता सटीकता और गुणवत्ता में बढ़ाती होती हैं।
– कार्यकारी वित्तपोषण कम हो जाती हैं।
– कम नुकशान और उत्पादन प्रक्रिया से पहले बहुत अच्छा मूल्यांकन हो सकता हैं।
– विनिर्माण के लिए तैयार ड़ेटाबेझ प्राप्त किया जा सकता हैं।
– आयोजन क्षमता और उत्पादन में वृद्धि होती हैं।
– इन्वेंटरी को अच्छी तरह से नियंत्रण किया जा सकता हैं।
– प्रतिस्पर्धा की तरह जीवित रहने की क्षमता होती हैं।
– प्रशिक्षण के समय को कम करता हैं।
– यह प्रणाली दस्तावेजी साक्ष्य तैयार करने में मदद करती हैं और इसमें अधिक जानकारी संग्रहित कर सकती हैं।
– इस प्रणाली का उचित उपयोग सामग्री, मशीनरी समय और निरिक्षण के समय का बचाव होता हैं।

२.४ CAD/CAM के उपयोग:

– 2D और 3D ड्राइंग चित्रित करने के लिए।
– बहुत सारे 3D ऑब्जेक्ट्स से असेम्बली मॉडलिंग के लिए।
– स्कूटर, कार ट्रक, विमान या सबमरीन के लिए बॉडी का आकर और डिज़ाइन में उपयोगी हैं।
– टोलरन्स विश्लेषण के लिए।
– मैकेनिकल डिज़ाइन के लिए।
– सीमित तत्व विश्लेषण के किया जा सकता हैं।
– मोल्ड डिज़ाइन, मोल्ड फ्लो विश्लेषण के लिए।
– सिविल इंजीनियरिंग में स्ट्रक्चर का विश्लेषण के लिए।
– काइनेमेटिक और डायनेमिक विश्लेषण के लिए।
– थर्मल विश्लेषण के लिए।
– उपकरण डिज़ाइन के लिए।
– बड़ी फेक्टरी के लिए पाइप के ले-आउट में।
– केमिकल इंजीनियरिंग में मॉलेक्यूलर विश्लेषण, केमिकल बिच की रासायनिक प्रक्रियाए जाने ने के लिए।
– समग्र सामग्री का उपयोग से डिज़ाइन करने के लिए।
– कोई भी मोडेल बिना बनाने सिम्युलेशन करने के लिए।
– प्रक्रिया योजना के लिए।
– थकान और फ्रैक्चर विश्लेषण के लिए।
– कंपन विश्लेषण के लिए।
– विनिर्माण के लिए डेटाबेझ तैयार किया जा सकता हैं। जिसका उपयोग CNC मशीन, EDM या अन्य कंप्यूटर संचालित मशीन चला सकते हैं।
– चिकित्सा विश्लेषण में उसका बहुत अधिक उपयोग में वृद्धि हुई हैं।म
– तिव्र प्रतिकृति के लिए।
– आभूषण डिज़ाइन, फैशन डिज़ाइन और आंतरिक डिज़ाइन के लिए।
– दुर्घटना का विश्लेषण, इलेक्ट्रो मेग्नेटिक विश्लेषण और गति विश्लेषण किया जा सकता हैं।

३. डिज़ाइन कदम और CAD/CAM को लागू करने के कारण:
३.१ डिज़ाइन की परिभाषा:

डिज़ाइन का मतलब हैं की वैज्ञानिक नियमो, तकनीकी जानकारी और उपयोग की आवश्यकताओ की एक एसी प्रणाली बनाना या जो सस्ते दर और कुशल की तरह उसका कार्य कर सके।

३.२ डिज़ाइन प्रक्रिया के कदम:

इस डिजाइनिंग प्रक्रिया में निन्मानुसार महत्वपूर्ण करम शामिल होते हैं:

– डिज़ाइन की अवधारणा
– डिज़ाइन का संश्लेषण
– डिज़ाइन का विश्लेषण और उसका उतीच उपयोग
– डिज़ाइन का मूल्यांकन
– डिज़ाइन चित्रण

डिज़ाइन का विचार आमतौर पर डिज़ाइन इंजीनियरो के विच चर्चा से लिया गया हैं। कभी कभी सेल्समेन या जिसका हिस्सा एक नई बाजारमांग आधारित प्रोडक्ट बनाने होते हैं। आमतौर पर प्रारंभिक डिज़ाइन बहुत जटिल होती हैं। डिज़ाइन का यह विशेष कदम भौतिक और कार्यकारी विशेषताओ पर केन्द्रित की जाती हैं। नइ प्रोडक्ट की किंमत, गुणवत्ता और उसकी कार्यसिद्धि की तुलना एक पुराने प्रोडक्ट के साथ की जाती हैं। डिज़ाइन का यह कदम प्रोडक्ट के सामान्य कंपोनेंट्स होते हैं। किन्तु उसमे विषेश विवरण का अभाव होता हैं। डिज़ाइन की अवधारणा आमतौर पर एक तस्वीर के रूप में लागु की जाती हैं।

डिज़ाइन प्रक्रिया में डिज़ाइन का विश्लेषण और संश्लेषण बहुत ही ऊंचाई पे और नजदीक के संबंध होते हैं। इस चरण में सब से पहले किये गए प्राथमिक डिज़ाइन का विश्लेषण किया जाता हैं। यह एक सतत चलती प्रक्रिया हैं और डिज़ाइन बनाने के लिए ध्यान में लिए गए बाधाए अनुपातिक मात्रा में अस्वीकार किया जा सकता हैं तब तक हमने बनाए गए प्रणाली का विश्लेषण कर के एक वुनियादी डिज़ाइन प्रदान कर सकते हैं। ठीक इसी तरह से हम अपने संश्लेषण चरण में आगे बढ़ सकते हैं।

डिज़ाइन का मूल्यांकन करने के लिए जो विशेषताए प्राप्त करने के लिए हमने प्रणाली बनाई हैं वही ही विशेषताओ का मापन कर के उसमे कितनी शुद्धता और रिपीटेबल शुद्धता प्राप्त कर सकते हैं। जिससे डिज़ाइन का मूल्यांकन किया जाता हैं। इस प्रकार के मूल्यांकन करने के लिए कभी कभी हम मूल उत्पादन की प्रतिकृति बनाकर उसकी जाँच भी करते हैं।

डिज़ाइन का अंतिम चरणतैयार हुई डिज़ाइन की शुरूआत होती हैं जिसमे तैयार हुए प्रणाली के ड्राइंग, मटिरियल विशेषताए, असेम्ब्ली सूची विगेरे पेपरकार्य का समावेश होता हैं। इसके द्वारा हम सामान्य रूप से विभिन्न डिज़ाइन डेटाबेझ बना सकते हैं।

सामान्य रूप से CAD सॉफ्टवेर का उपयोग डिज़ाइन के इस अलग अलग पांच चरण में करना होता हैं। अलग अलग CAD सॉफ्टवेर का फायदा और नुकशान अलग हो सकते हैं।

जो आकृति १.५ में समज सकते हैं:

३.३ डिजाइनिंग में कंप्यूटर का उपयोग:

व्यवस्थित डिज़ाइन प्रक्रिया मुख्य रूप में ड्राइंग बोर्ड के आसमास निर्धारित जी जाती हैं और उसके बाद प्रणाली के हिस्से का विभिन्न ड्राइंग को डॉक्यूमेंट के रूप में तैयार किया जाता हैं। इस ड्राइंग में पुरे प्रोडक्ट का ड्राइंग और उसके संबंधित सब असेम्बली और जिसके लिए उपयोगी जिग और फिक्चर के ड्राइंग भी चित्रित किया जाता हैं। इस ड्राइंग को करने के लिए विभिन्न पद्धतिया हो सकती हैं। किन्तु आमतौर पर पेपर पे पेन या पेन्सिल से ड्राइंग किया जाता हैं। जो वास्तव में बहुत ही बोरिंग और धैर्य रखने वाला कम हैं और जिसमे बहुत ही समय लगता हैं।

इस नुकशानो को दूर करने के लिए कंप्यूटर एक बहुत ही उपयोगी हैं।

३.३.१ ज्यामितीय मॉडलिंग के बारे में जानकारी:

इस चरण में ऑब्जेक्ट की भूमिका गाणितिक विवरण शामिल होता हैं। इस गाणितिक विवरण ग्राफ़िक टर्मिनल पे ऑब्जेक्ट की छवि प्रदर्शित करना उपयोगी हैं। ऑब्जेक्ट का मॉडलिंग 2D या 3D में हो सकता हैं। मुख्यरुपे मॉडलिंग की तिन रीतो का समावेश होता हैं। वायर फ्रेम मॉडलिंग, सरफेस मॉडलिंग और सॉलिड मॉडलिंग आमतौर पर CAD सॉफ्टवेर में सॉलिड मॉडलिंग का उपयोग कर के प्रोडक्ट की 3D छवि कलरग्राफ़िक्स टर्मिनल पे मिल सकती हैं। उस कलर ग्राफ़िक्स टर्मिनल का उपयोग से प्रोडक्ट को ज्यादा आकर्षित और ज्यादा विश्लेषात्मक बना सकते हैं।

३.३.२ इंजीनियरिंग विश्लेषण:

कोई भी इंजीनियरिंग डिज़ाइन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए इंजीनियरिंग विश्लेषण जरुरी हैं। इस विश्लेषण में स्ट्रेस-स्ट्रेइन गणतरी, उष्मावहन की गणतरी, विकलन के समीकरण से डिज़ाइन की हुई प्रणाली की गतिशील प्रॉपर्टीज विश्लेषण पद्धति का उपयोग करता हैं।

मास प्रॉपर्टीज विश्लेषण में सॉलिड ऑब्जेक्ट का दर, कद, क्षेत्रीय विस्तार, वजन और गुरुत्वाकर्षण का केंद्र का विश्लेषण किया जाता हैं।

३.३.३ सिम्युलेशन:

CAD सॉफ्टवेर की एक महत्वपूर्ण विशेषता का मतलब सिम्युलेशन ग्राफ़िक्स टर्मिनल पे डिज़ाइनर से सरलता से ऑब्जेक्ट को देख सकते हैं और गाणितिक मॉडलिंग से ऑब्जेक्ट की गतिशील स्थिति को देख सकते हैं। इसके अलावा असेम्बली के दो हिस्सों के बिच में रहे हुए इन्टरफेरेन्स फिट जाँच करने के लिए और असेम्बली की गतिशील स्थितिमें वास्तविक गति दक्ष सकते हैं और कितनी जगा उपयोगी हैं उसकी अवधारणा प्राप्त की जा सकती हैं।

३.३.४ स्वचालित प्रारूपण:

कंप्यूटर का उपयोग द्वारा ड्राइंग जल्दी से तैयार कीया जा सकता हैं। ड्राफ्ट्समेन की कार्यक्षमता में वृद्धि होती हैं स्वचालित प्रारूपण ड्राइंग का संगत माप बताने के लिए, ड्राइंग की जरुरी स्केलिंग करने के लिए, विनिर्माण आवश्यकता के अनुसारप्रोडक्ट के सेक्शनल व्यू बनाने के लिए, प्रोडक्ट की सब असेम्बली, फाइनल असेम्बली ड्राइंग और प्लान ले आउट जल्दी से सटीक और सुसंगत परिणाम प्राप्त करना उपयोगी हैं।

३.४ CAD/CAM के कार्यात्मक क्षेत्र:

CAD/CAM के कार्यविस्तार में CAD प्रणाली को संलग्न और CAM प्रणाली को संलग्न कार्य का समावेश होता हैं और दोनों प्रणाली को शामिल करने वाला कार्य भ शामिल हैं जिसे निन्मानुसार वर्गीकृत किया जा सकता हैं:

१. ज्यामितीय मॉडलिंग
२. इंजीनियरिंग विश्लेषण
३. डिजाइन की समीक्षा और मूल्यांकन
४. स्वचालित प्रारूपण
५. अन्य महत्वपूर्ण कार्यो

३.४.१ ज्यामितीय मॉडलिंग:

इस चरण में ऑब्जेक्ट की भूमिकाओं के गाणितिक विवरण शामिल हैं। इस गाणितिक विवरण ग्राफ़िक टर्मिनल पे ऑब्जेक्ट की छवि प्रसारित करने में उपयोगी हैं। कंप्यूटर गाणितिक विवरण को इकठ्ठा करते हैं और उसका भविष्य में उपयोगी हो सकता हैं। CAD प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताए सॉलिड मॉडलिंग और उसमे किया जाता डायनामिक बदलाव हैं। डिज़ाइनर ऑब्जेक्ट का सॉलिड मॉडल लप वही ही अलग अलग व्यू में देख सकते हैं और उसका ज्यादा आकर्षक और वजन हल्का और देखते ही पसंद आ जाये वैसा बना सकते हैं।

३.४.२ इंजीनियरिंग विश्लेषण:

एक बार ऑब्जेक्ट का मॉडलिंग तैयार होने के बाद इंजीनियरिंग विश्लेषण जिया जाता हैं। यह विश्लेषण से ऑब्जेक्ट का कद, दर, क्षेत्रीय विस्तार, गुरुत्वाकर्षण का केंद्र, मोमेंट ओफ इनर्सिया, ऑब्जेक्ट का वजन और द्रढ़ता जाना जा सकता हैं। डिज़ाइनर कंप्यूटर पे ऑब्जेक्ट की प्रतिकृति बनके उसके अलग अलग टेस्ट स्क्रीन पैर ही कीया जा सकता हैं। तदनुसार उसने बदलाव किया जा सकता हैं। इंजीनियरिंग विश्लेषण के लिए सब से महत्वपूर्ण रीत FEM(finite element method)हैं। जिसमे जो हिस्से का विश्लेषण करना हो उसको छोटे छोटे हेस्से में विभाजित किया जाता हैं और वह हरेक हिस्सा दुसरे हिस्से के साथ एक नोड पर शामिल किया गया होता हैं। जितना नोड ज्यादा उतना अंदाजित परिणाम लगभग ज्यादा अच्छा मिलता हैं।

FEM रीत का उपयोग कर के स्ट्रेस-स्ट्रेइन विश्लेषण, उष्मावहन विश्लेषण जैसे विश्लेषण ज्यादा योग्य रीत से किये जा सकते हैं।

इसके अलावा यह परिणामो के ग्राफ़िक्स रीत से भी कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रस्तुत कर सकता हैं जो उपयोगी विश्लेषण प्रस्तुत करता हैं।

३.४.३ डिजाइन की समीक्षा और मूल्यांकन:

इंजीनियरिंग विश्लेषण के बाद तैयार हुआ मॉडल का फाइनल ड्राइंग करने से पहले डिज़ाइनर कंप्यूटर पे ड्राइंग को ज़ूम करके हरेक दो सम्मिलित हिस्से के बिच इन्टरफेरेन्स फिट ठीक हे की नहीं वह चेक कर सकते हैं। प्रोडक्ट की डिज़ाइन की समीक्षा के लिए “लेयरिंग” भी एक उपयोगी रीत हैं। उदहारण: कोई कास्टिंग किया हुआ प्रोडक्ट पे फिनिश मशिनींग करना हो तो वह कास्टिंग किया हुआ प्रोडक्ट पे प्रोडक्ट का सिवाय माप रफ मशीनिंग और फिनिश मशीनिंग के लिए पर्याप्त मटिरियल हैं की नहीं वह ज्ञात कर सकते हैं।

इसके अलावा cad सॉफ्टवेर में काईनेमेटिक पैकेज प्रदान किया जाता हैं या जो गतिशील जुड़े हुए हेस्से का एनीमेशन चित्र प्रस्तुत कर सकते हैं और उपयोगकर्ता को जुड़े हुए मिकेनिकल हिस्सा किस तरह से, कितनी जगह में गति कर सके उसका द्रश्य प्रस्तुत किया जा सकता हैं। जो CAD सॉफ्टवेर की महत्वपूर्ण विशेषता कहा जा सकता हैं। जिसे लिए लगभग हरेक CAD सॉफ्टवेर के ADAMS(Automated Dynamic Analysis of Mechanical Systems)एकीकृत होती हैं।

३.४.४ स्वचालित प्रारूपण:

इस चरण में हमने तैयार किया हुआ ऑब्जेक्ट के सॉलिड मॉडल के ऊपर से कंप्यूटर में अपने आप तैयार हुआ CAD डेटाबेझ पर से हमने ड्राइंग को प्लॉटर या प्रिन्टर की सहायता से कागज पे (हार्ड कोपी) ले सकते हैं। इसके सिवाय के उपयोग हमे विभाग २.३ समझे थे उसके अनुसार ही हैं।

३.४.५ अन्य महत्वपूर्ण कार्यो:

– उत्पादन का वर्गीकरण और संकेतिकरण
– CAD और CAM के बिच की लिंक

उत्पादन का वर्गीकरण और संकेतिकरण:

ऊपर बताये अनुसार चार कार्यो कंप्यूटर द्वारा होने से कोई भी उत्पादन की हरेक डिज़ाइन संबंधित जानकारी कंप्यूटर डेटाबेझ में संग्रहित हैं और जिसमें से सामान डिज़ाइन जानकारी वाले प्रोडक्ट को अलग अलग समूहों में विभाजित किया गया हैं। जिसके लिए एक नियोजित संकेतिकरण प्रणाली बनानी होती हैं। इस समग्र कार्य के पिछला मुख्य उद्देश्य यह हैं की भविष्य में जब कोई नई प्रोडक्ट आये तो वह किस समूह से मिलता हैं वह खोजने के बाद वही समूह में आगे बढ़के जल्दी से वह प्रोडक्ट की डिजाइनिंग की जा सकती हैं या फिर जो प्रोडक्ट बन रही हैं उसमे बदलाव कर के या उसका फिरसे डिजाइनिंग करने के लिए भी जरुरी हैं।

CAD और CAM के बिच की लिंक:

हमने अध्यय्के प्रथम भाग में देखा की CAD और CAM स्वतंत्र रूप से पिछले २५-३० सालो से इन्डस्ट्रीझ में विकसित हो रहे हैं। किन्तु जब तक उसका योग्य संकलन न हो तब तक संपूर्ण ऑटोमेशन का ध्येय सिद्ध न हो सके। इस प्रकार , यह संपूर्ण ऑटोमेशन के लिए जरुरी एसी लिंक का मतलब CAPP(Computer Aided Process Planning) या जो कंप्यूटर पर तैयार किया जा सकता हैं। जो डिज़ाइन इंजीनियर तैयार किया गया ड्राइंग को पढ़ के उसके अनुशार जानकारी और आदेश विनिर्माण मशीन को डेता हैं। आदर्श भविष्य की फेक्टरी की प्रणाली हैं।

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